भोजपुरी कला कोहबर महोत्सव 12 से

आगामी 12 फरवरी से भटनी में भोजपुरी कला कोहबर महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। 12 से लेकर 14 फरवरी तक भटनी के रेलवे मैदान में होने वाले इस समारोह में शहर के गणमान्य अतिथि भाग लेंगे। भागवत बाल एवं महिला कल्याण संस्थान माधोपुर के तत्वावधान में आयोजित होने वाला यह आयोजन भाषा एवं संस्कृति के समग्र विकास का जनांदोलन होगा। यह जानकारी शुक्रवार को एक पत्रकारवार्ता में लोक गायक राकेश श्रीवास्तव व ई. संतोष कुमार मिश्र ने दी। इस अवसर पर एक स्वर परीक्षा भी 7 फरवरी को होगी। इसके लिए आवेदन पत्र भी उपलब्ध कराये जा रहे हैं। उनमें चयनित कलाकारों को भोजपुरी कला कोहबर मंच पर सम्मानित किया जाएगा। साथ ही पूर्वाचल की विभूतियां भी सम्मानित होंगी। मुख्य अतिथि पूर्व सांसद ले. ज. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी होंगे। पं. सुनील शर्मा बलिया, रमाकांत रसिक गाजीपुर, अनुपमा यादव बाल कलाकार गोरखपुर, 13 को मुख्य अतिथि राकेश त्रिपाठी मुख्य वाणिज्य प्रबंधक एफ.एम.एस. पू.रे. होंगे। श्रीमती उर्मिला श्रीवास्तव मिर्जापुर, देवेन्द्र नाथ राय बक्सर, रंजना भारती बिरहा गायिका, छेदीलाल फरुआही, हास्य नाटिका हुडूकच्चूल्लु राजेश द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। 14 फरवरी को मुख्य अतिथि मंडलायुक्त पी.के.महान्ति होंगे और श्रीमती मैनावती देवी श्रीवास्तव लोकगायिका गोरखपुर, अमृता श्रीवास्तव भजन गायिका गोरखपुर, भावना श्रीवास्तव लोकगायिका गोरखपुर, विजय कपूर वाराणसी, बाबूनंदन धोबिया नृत्य गाजीपुर और नौटंकी शैली पर आधारित नाटक बदलता जमाना युवा संगम के पियूषकांत अलग द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।

पुरनका जमाना के भोजपुरी सुपरस्टार सुजीत कुमार के निधन

पुरनका जमाना के भोजपुरी सुपर स्टार सुजीत कुमार के शुक का फजीरे मुंबई का बंगला पर निधन हो गइल. ऊ पचहत्तर बरीस के रहलें ह. पुरनका जमाना में निर्देशक का रुप में फिल्मन से जुड़ल सुजीत कुमार सबसे पहिले बिदेसिया फिल्म के नायक बनलन आ ओकर सफलता उनका के स्टार बना दिहलस. लोग भुलाइये गइल कि ऊ निर्देशको रहलें. उनका कैंसर हो गइल रहल ह आ ढेर दिन से ओकरे तकलीफ झेलत रहलन ह. सुजीत कुमार चन्दौली जिला के बबुरी इलाका के भवतपुर गाँव में जनम लिहलें आ चकिया कालेज से इंटर पास कइलें. हरिश्चन्द्र कालेज बनारस से बीए आ काशी विद्यापीठ से एमए कइले रहन. पिछला बेर साल २००१ में ऊ अपना बाबूजी रामाधार सिहं का तेरही में गाँवे आइल रहलें.

Source: http://www.anjoria.com/tatka-khabar/news.htm

पैसा और रसूख हो तो पढ़ाई का धंधा सबसे चोखा-राजकेश्वर सिंह

पढ़ाई का धंधा सबसे आसान है। सरकार की मुहर भी लग ही जाती है। इसलिए तकनीकी से लेकर चिकित्सा तक और वाणिज्य से कला तक हर क्षेत्र में ऐसे शिक्षा संस्थान उग आए, जिनमें बहुत कुछ संदेहास्पद है मगर इन्हें नियम कानूनों के पेंच के सहारे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), चिकित्सा परिषद (मेडिकल काउंसिल) और तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की मंजूरी मिल जाती है। ताजा सूरते हाल यह है कि कुल 480 विश्वविद्यालयों में से 148 और कुल 22 हजार कालेजों में से सिर्फ 3942 ही सरकार के अधिकृत प्रमाणन संस्था राष्ट्रीय मूल्याकंन एवं प्रत्यायन बोर्ड (एनएएसी) से मान्यता प्राप्त हैं। उच्च शिक्षा का पूरा ढांचा किल्लत का बाजार है इसलिए इन निजी व्यापारियों की हर तरफ पौ बारह है। उच्च शिक्षा में बुनियादी ढांचे की कमी है। मोटेतौर पर लगभग तीन सौ और विश्वविद्यालयों और दो हजार से अधिक कालेजों की जरूरत है। उनमें भी 18 से 24 साल के बच्चों की संख्या के मद्देनजर उत्तर प्रदेश में 63, बिहार में 32, पश्चिम बंगाल में 30, महाराष्ट्र में 20 और राजस्थान में 13 और विश्वविद्यालयों की दरकार है। सरकार इसे पूरा करने की स्थिति में नहीं है। नतीजा यह है कि निजी क्षेत्र फल-फूल रहा है। जरा गौर करिए। किसी को इंजीनियरिंग कालेज या फिर अपने कालेज को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाना है तो सीधे केंद्र सरकार को आवेदन करना होता है। उसके बाद उस आवेदन पर अगली कार्रवाई का जिम्मा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) पर है। दोनों मामले में तरीका एक ही है। विशेषज्ञ समितियां ही उन कालेजों का भौतिक सत्यापन करती हैं। विशेषज्ञ समितियां की सिफारिशों पर ही सरकार भी अपनी मुहर लगा देती है और फिर कालेज या डीम्ड यूनिवर्सिटी चल पड़ती है। भले ही उसके बाद वे जरूरी मापदंडों को पूरा करते हों या नहीं। होना तो बहुत कुछ चाहिए, लेकिन वह सब होता कहां है। मसलन् किसी संस्थान के पास कुल जमीन कितनी है। खुद की है या फिर लीज पर है। पढ़ाने के लिए कमरे कितने हैं। छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग हास्टल हैं या नहीं। लैब कैसा है? सभी शिक्षक उच्च शिक्षा के नियत वेतनमान के दायरे में हैं। संस्थान का नियमित निदेशक या प्रिसिंपल है या नहीं। सभी फैकल्टी का भविष्य निधि (पीएफ) कटता है या नहीं। शिक्षक व छात्र अनुपात मानक के लिहाज से है या नहीं। उसके पाठ्यक्रम राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं या नहीं। संस्थान राष्ट्रीय मूल्याकंन एवं प्रत्यायन बोर्ड से प्रमाणित है या नहीं? इसके अलावा फीस वसूली और दाखिले की प्रक्रिया जैसे मामले भी महत्वपूर्ण हैं।

चलनी में पानी का लोकार्पण

पूर्वांचल एकता मंच द्वारा दिल्ली में आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मेलन में उतर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस सांसद श्री जगदिम्बका पाल के हाथों भोजपुरी के प्रख्यात साहित्यकार मनोज भावुक के गीत संग्रह चलनी में पानी का लोकार्पण हुआ।

इस अवसर पर फिल्म  अभिनेता श्री शत्रुधन सिंहा, महुआ चैनल के चेयरमैन श्री पीके तिवारी, भोजपुरी सुरसम्राट मनोज तिवारी एवं लोकगायिका मालिनी अवस्थी जैसी हस्तियां मौजूद थीं।

लोकार्पित पुस्तक की प्रशंसा करते हुए पूर्वांचल एकता मंच के अघ्यक्ष शिवजी सिंह ने कहा कि मनोज भावुक भोजपुरी के लोकप्रिय गजलकार  एवं फिल्म समीक्षक है और इन्होने अफ्रीका एवं ग्रेट ब्रिटेन आदि देशों में भोजपुरी का परचम लहराया है। इसलिए भोजपुरी साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट, बहुआयामी और बहुमुल्य योगदान के लिए इन्हें पूर्वाचल एकता मंच की ओर से भोजपुरी के अन्य शीर्ष कवियों के साथ डॉ प्रभुनाथ सिंह सम्मान से नवाजा गया।

विदित हो कि मनोज भावुक को उनके भोजपुरी गजल संग्रह ‘तस्वीर जिन्दगी के’ के लिए भी सन् 2006में भारतीय भाषा परिषद् सम्मान से सम्मानित किया गया था। उन्हें सम्मान प्रदान किया था ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी एवं आस्कर अवार्ड से सम्मानित सिंने जगत के नामी गीतकार गुलजार ने। एक मात्र भोजपुरी साहित्यकार कों यह सम्मान प्राप्त है।

चलनी में पानी भावुक का दोहा एवं गीत संग्रह है। पुस्तक की भूमिका में डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव ने लिखा हैं कि यह जिन्दगी एक चलनी समान है। आदमी जिन्दगी भर इससे पानी उलीचता रह जाता है फिर भी आखिर में हासिल कुछ भी नहीं होता। नश्वरता दर्शन का ऐसा विम्ब साहित्य में दुर्लभ नहीं तो कम अवश्य है। चलनी में पानी सहज प्रयोग में भी गूढ़ दर्शन को व्यक्त करता है। भावुक ने एक दोहा में कहा है -

चलनी में पानी भरत बीतल उम्र तमाम

तबहू बा मन में भरम कइनी बहुते काम !

विश्व भोजपुरी सम्मेलन में उपस्थित लाखों दर्शको ने तालियॉ बजाकर मनोज भावुक के इस लोकार्पित पुस्तक का स्वागत किया।

कान्हा का कदम्ब

कान्हा का कदम्ब

कान्हा का कदम्ब

कान्हा का कदम्ब

 
गाँव-गाँव, गली-गली
कान्हा की धूम है ,
कदम्बो की डालों पे
फूलों की बूम है |
घुमड़-घुमड़ बदरा बरसे
बिजली में जूम है,
जिन्दगी की राह में
जाने कितने घूम है |
कहीं सूखती फसलें 
कहीं बालियों की चूम  है,
कितनों के सर पे छत नहीं,
कितनों के रूम-रूम है |
 
सुधांशु , गोरखपुर
 
 

धूमधाम से मनी श्री कृष्ण जन्माष्टमी

14 MUKESH 12धूमधाम से मनी श्री कृष्ण जन्माष्टमी

गोरखपुर. शहरी व ग्रामीण इलाकों में  श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया . इस मौके पर मध्यरात्रि तक लोग भजन-कीर्तन में तन्लीन रहे. पूरी रात  बांकेबिहारी की जयकार होती रही. शहर में काफी भव्य झांकिया सजायी गयी. नटवर नागर गोविंदा,  माखनचोर के रूप में बालकलाकारों ने  कृष्णलीला की. बाद में लोंगो ने प्रसाद वितरण भी किया- सुधांशु

हर्षोल्लास से मना रक्षा बंधन

हर्षोल्लास से मना रक्षा बंधन

हर्षोल्लास से मना रक्षा बंधन

हर्षोल्लास से मना रक्षा बंधन

गोरखपुर | भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व रक्षा बंधन हर्षोल्लास से मनाया गया |
पर इस बार राखी पर भद्रा ने बहनों भाईयो को शाम तक इंतजार कराया |
शाम ४.१७ के बाद शुभ मुहूर्त में बहनों की रखिया भाइयो की कलाई पर सजी|
सभी बहनों ने अपने भाइयो की लम्बी उम्र और उनकी बेहतरी व तरक्की के लिए
भगवान से प्रार्थना की | 
सबको राखी की शुभकामनाओ के साथ ! 
सुधांशु

गोरखपुर में होली की तैयारियाँ

holi-1

Holi ki taiyari pure jor-shor se chal rahi hai,
bazar me rang-birangi pichkariya, abir, gulal aur
lal, hare, pile,neele aur tarh-tarah ke rang bik rahe hai.
aaiye holi ke rangon me sarabor hokar aapas me khushiyan bante,
Holi ki aagrim Shubhkamnayon ke sath
-Sudhanshu,Gkp

पुरुबिया न्यूज चैनल हमार टीवी

Kumar Sanjoya Singh

Kumar Sanjoya Singh

07 फरवरी 2009, देश का इकलौता पुरुबिया न्यूज चैनल हमार टीवी आज लाँच हो गया… खबरों की दुनिया में पॉजिटिव मीडिया ग्रुप एक जाना-पहचाना नाम है। इसी के एक और प्रयास के रूप में हमार टीवी चैनल की दुनिया में एक नया नाम बन कर सामने आया है। ग्रुप के मैनेजिंग एडीटर कुमार संजॉय सिंह का कहना है, “हम एक अनोखा  प्रयोग ये कर रहे है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखण्ड की लगभग सभी बोलियों-भाषाओं में बुलेटिन प्रसारित किये जाएंगे। दूसरी बड़ी कोशिश है कि चैनल को आंचलिक चैनलों के नाम पर परोसी जाने वाली अश्लीलता और फूहडपन से बचाकर पूरब के लोगों की पसंद के बहाने हो रही बाज़ारू तिकडम से लड़ा जाए। कुल मिलाकर पूरब की सही तस्वीर सामने लाई जाए और वहां की जरुरतों व समस्याओं को सलीके से पेश किया जाए।”

पूरब के मुकम्मल चैनल के तौर पर हमार टीवी भोजपुरी, अंगिका,  मगही, बज्जिका, मैथिली, नागपुरी और खोरठा में भी न्यूज़ बुलेटिन प्रसारित कर रहा है। इतना ही नहीं, हमार टी वी जल्दी ही अपने गुलदस्ते में अवधी और ब्रज भाषा को भी सजा लेगा।  हमार टीवी देश-दुनिया के सामने पुरबिया हित की बात रखने की कोशिश तो करेगा ही, पूरब की गौरवशाली संस्कृति, सभ्यता और परंपरा की पहचान दिलाने में अपनी भूमिका निभाने में आगे रहेगा।

हमार टीवी को लाँच करने वाली जुझारु टीम के मुखिया कुमार संजॉय सिंह को जनसत्ता,इंडिया टुडे,आज तक और एनडीटीवी में लगभग 18 साल के लंबे कार्यकाल ने  प्रिंट और इलैक्ट्रॉनिक दोनों माध्यमों की गहरी पकड़ दी है। इसका उन्होनें इस ग्रुप के तीनों नये चैनलों हमार टीवी, फोकस टीवी और एच वाई टीवी को अलग तेवर और पहचान दिलाने के लिये बखूबी इस्तेमाल किया है। उनका कहना है कि हमार टीवी का मिशन पुरुबिया इलाके के लोगों की असली छवि  को दुनिया को सामने पेश करना है। अभी तक जो स्थिति है उसमें पुरुबिया बोली-भाषा के घटिया गीत-संगीत, दोयम दर्जे की फिल्में और भदेस कामेडी व कमेंट्री ही पुरुबिया लोगों की पहचान के रूप में बाजार में प्रचलित है। इनके जरिए ही देश-विदेश के दूसरे हिस्सों के लोग पुरबिया समाज व लोगों को आंकते हैं। पर वस्तुस्थिति इसके ठीक उलट है। भोजपुरी समाज में जो समृद्ध लोक संगीत की परंपरा है, जो प्रतिभा है, जो मेधा है, जो समझ है, जो संस्कार है, जो रिश्ते-नाते हैं और जो सामूहिकता है… वो  कहीं देखने को नहीं मिलती। दिक्कत यह है कि बाजार के दबाव में जिस तरह की चीजें पुरबिया के नाम पर परोसी जा रही है, वो इस  समृद्ध परंपरा के उलट है। श्री कुमार का कहना है, ” इस छवि को बदलने का काम हमार टीवी करेगा। हमने निर्णय लिया है कि चैनल को हिट करने के लिए हम  दोयम दर्जे की फिल्मों या वीडियो आदि का सहारा कतई नहीं लेंगे।  हम स्वस्थ कार्यक्रम पेश करेंगे जिनके जरिए भोजपुरी समाज की असल छवि लोगों तक पहुंचेगी। हम खुद को खबरों पर ज्यादा केंद्रित रखेंगे और इसके साथ जो भी दिखाएंगे वो संजीदगी के साथ दिखाएंगे।”

हमार टीवी पुरुबिया लोगों को एक अलग पहचान दिलाएगा। मिसाल के तौर पर  बाहर के लोगों को ये तो पता है कि देश के पहले राष्ट्रपति पुरबिया इलाके से थे, पर ये नहीं पता होगा कि दिल्ली के पहले उपराज्यपाल एएन झा, पहले चीफ जस्टिस बीएन  सिंह, दिल्ली के पहले आईजी महावीर सिंह ये सब उसी इलाके के रहे हैं। ऐसे ही ढेर सारे तथ्य हैं जिन्हें दुनिया जानती ही नहीं है इसलिए पुरुबिया समाज की कुछ अजीब सी छवि उनके मन में है । हमार टीवी इस विडंबना से पुरबिया पहचान को मुक्त कराने की लड़ाई लड़ेगा। इसलिए एस चैनल को केवल बिहार-झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में ही नहीं पूरे देश के तमाम बड़े शहरों में भी डिस्ट्रीब्यूट किया जा रहा है।

हमार टीवी को बाहर के अलावा एक लड़ाई अपनी जमीन पर भी लड़नी है। अपने  राजनेताओं की अदूरदर्शी नीतियों की वजह से पुरुबिया इलाके के लोग काफी झेल चुके हैं और झेल रहे हैं। जमींदारी खत्म करने के नाम पर यहां गेहूं के साथ घुन की तरह मंझौले किसानों को भी पीस दिया गया, नतीजतन परंपरागत तौर पर लगभग स्वावलंबी रहे गांव शहरों की बाट जोहने लगे और फिर  साठ के दशक में किसान और मजदूर दोनों गांव छोड़कर भागे मगर बंगाल में जूट मिलें, नेपाल में चावल मिलें बंद होने लगीं। असम के चाय बागान में अलगाव की आग लगी तो बडी तादाद में वहां काम कर रहे पुरबिया मजदूरों के सामने संकट आ गया और फिर ढाई दशक पहले पुरबियों ने बड़े पैमाने पर दिल्ली, पंजाब और मुंबई का रुख किया। इसके बाद ही उनकी छवि पर और अब तो उनके होने पर भी हमले शुरु हो गए। कुल मिलाकर विस्थापन व जीविकोपार्जन की पीड़ा और अपने नेताओं की नालायकी के शिकार इन पुरबियों की पीड़ा अब भी अनसुनी सी है। हमार टीवी इन सब मुद्दों को संज़ीदगी से छुएगा। इसके लिए चैनल पर सत्तर फ़ीसदी खालिस ख़बर होगी। बाकी के तीस फीसदी में जो प्रोग्राम होंगे वो भी इन्हीं बड़े मुद्दों के इर्द-गिर्द होंगे। हमार के बाद फोकस को भी लाँच कर दिया गया और कुछ ही दिनों में हैदराबाद से एचवाई टीवी भी लाँच हो जाएगा।

इस ग्रुप की खास बात यह है कि इसने आजतक सिर्फ कामयाबियों के दास्तान लिखे हैं। ग्रुप के अध्यक्ष मतंग सिंह का मानना है कि हमार टीवी पॉजिटिव परिवार के गुलदस्ते का एक ऐसा फूल है जो अपनी अलग ही खुशबू बिखेरेगा। श्री मतंग सिंह के अनुसार इसी साल पॉजिटिव ग्रुप तीन और चैनल लाने की तैयारी में है।

गोरखपुर में भोजपुरी फ़िल्म की शूटिंग

भरि द तूं गोदिया हमार

भरि द तूं गोदिया हमार

भरि द तूं गोदिया हमार ए छ्ठी मैया नामक भोजपुरी फ़िल्म की शूटिंग गोरखपुर में हो रही है। निर्माता अभिनेता मनोज वर्मा की यह दूसरी भोजपुरी फ़िल्म है। इसके पहले मनोज जी “चलीं आज देसवा के ओर” बना चुके हैं। इस फ़िल्म में मनोज वर्मा, मोहित घई, स्वाती वर्मा, कोमल ढिल्लो, अविनाश शाही, रतन वाष्णेय, अशोक शुक्ला जैसे कलाकार नजर आएंगे।

-सुधान्शु