आइने के सामने : उत्कर्ष
यह वो दौर नहीं
जब आइने के सामने बैठकर
कंघी काढी जाय,
और किया जाए रंगीन तितलियों के साथ
रोमांस की कल्पनाएं
आत्ममुग्ध वैज्ञानिक राष्ट्रपति
और उधार की अर्थव्यवस्था के पोषक
प्रधानमंत्री
और इन्हें मुंह चिढाती
किसानों की आत्महत्याएं
भूख से होती मौतें
टी.वी. के सेंसेशनल समाचारों से
नहीं छुप सकते
तुम्हें पता हो कि न हो
गांवों को जरूर पता है
कि अब वह दौर नहीं है
जब आइने के सामने..
उत्कर्ष : 15 अगस्त 2006 को गोरखपुर में